यौन उत्पीड़न : मिथ्या भ्रम व तथ्य

नीचे कुछ मिथ्या भ्रम व तथ्य दिए जा रहे है जो कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के संबंध में लोगो कि समझ को दर्शाते है | कृपया अपनी समझ के अनुसार हर एक लाइन के आगे 'म' (मिथ्या भ्रम) तथा 'त' (तथ्य) अंकित कीजिये

  1. हल्के रूप में महिलाएं यौन उत्पीड़न पसंद करती हैं और इसे अपनी प्रशंसा समझती हैं |      
  2. यह व्यवहार यौन उत्पीड़न न होकर हानिरहित छेड़छाड़ है |      
  3. केवल उन्ही महिलाओं का यौन उत्पीड़न होता हैं जो बहुत भड़काऊ कपडे पहनती हैं |      
  4. जब महिलाएं न कहती हैं तब वास्तव में उनके कहने का मतलब हाँ होता है |      
  5. यौन उत्पीड़न स्वाभाविक पुरुष व्यवहार हैं |      
  6. वास्तव में यौन उत्पीड़न कोई मुद्दा हैं ही नही और न ही इससे किसी को कोई हानि पहुंचती है |      
  7. यदि महिलाएं यौन उत्पीड़न के बारे में चुप रहे तो इसका मतलब है कि वे इसे पसंद कर रही हैं |      
  8. यदि महिलाएं उन स्थानों पर जाएं जहां उनका जाना स्वागतयोग्य नही है तो वहां पर यौन उत्पीड़न कि संभावना बनी रहती है |      
  9. जिन सहयोगी और अधिकारियो से महिलाएं नाराज़ होती हैं उनसे बदला लेने कि इरादे से यौन उत्पीड़न कि झूठी रिपोर्ट करती हैं |      
  10. यदि उत्पीड़क को नजर अंदाज कर दिया जाए तो वह संकेत समझकर ऐसा व्यव्हार बंद कर देगा |      
  11. अकसर कार्यस्थल पर महिलाओं द्वारा पुरुषों का भी यौन शोषण होता है |      
  12. ज्यादातर यौन शोषण के मामले में आरोपित व्यक्ति शिकायत करने वाले कर्मचारी से वरिष्ठ या बड़े पद पर होता है |      
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