यौन उत्पीड़न : मिथ्या भ्रम व तथ्य
नीचे कुछ मिथ्या भ्रम व तथ्य दिए जा रहे है जो कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के संबंध में लोगो कि समझ को दर्शाते है | कृपया अपनी समझ के अनुसार हर एक लाइन के आगे 'म' (मिथ्या भ्रम) तथा 'त' (तथ्य) अंकित कीजिये
- हल्के रूप में महिलाएं यौन उत्पीड़न पसंद करती हैं और इसे अपनी प्रशंसा समझती हैं |
- यह व्यवहार यौन उत्पीड़न न होकर हानिरहित छेड़छाड़ है |
- केवल उन्ही महिलाओं का यौन उत्पीड़न होता हैं जो बहुत भड़काऊ कपडे पहनती हैं |
- जब महिलाएं न कहती हैं तब वास्तव में उनके कहने का मतलब हाँ होता है |
- यौन उत्पीड़न स्वाभाविक पुरुष व्यवहार हैं |
- वास्तव में यौन उत्पीड़न कोई मुद्दा हैं ही नही और न ही इससे किसी को कोई हानि पहुंचती है |
- यदि महिलाएं यौन उत्पीड़न के बारे में चुप रहे तो इसका मतलब है कि वे इसे पसंद कर रही हैं |
- यदि महिलाएं उन स्थानों पर जाएं जहां उनका जाना स्वागतयोग्य नही है तो वहां पर यौन उत्पीड़न कि संभावना बनी रहती है |
- जिन सहयोगी और अधिकारियो से महिलाएं नाराज़ होती हैं उनसे बदला लेने कि इरादे से यौन उत्पीड़न कि झूठी रिपोर्ट करती हैं |
- यदि उत्पीड़क को नजर अंदाज कर दिया जाए तो वह संकेत समझकर ऐसा व्यव्हार बंद कर देगा |
- अकसर कार्यस्थल पर महिलाओं द्वारा पुरुषों का भी यौन शोषण होता है |
- ज्यादातर यौन शोषण के मामले में आरोपित व्यक्ति शिकायत करने वाले कर्मचारी से वरिष्ठ या बड़े पद पर होता है |
